शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

आरती शिवजी की

जय शिव ॐ कारा हेर शिव ॐ कारा ।
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अर्धांगिनी धारा । । ॐ .
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
हंसासन गरुडासन वृष वाहन साजे । । ॐ ।
दोय भुज चार चतुर्भुज, दस भुज से सोहे ।
तीनो रूप निखरता, त्रिभुवन सम मोहे । ॐ ।
अक्षमाला वनमाला, रुण्डमाला धारी ।
न्दन मृग मद चंदा, भाले शुभकारी । ॐ ।
श्येताम्बर पिताम्बर , बागाम्बर अंगे ।
सनकादिक ब्रह्मादिक, भूतादिक संगे । ॐ ।
लक्ष्मी अरु गायत्री , पारवती संगे ।
अर्धांगी अरु , त्रिभंगीसोहत है अंगे । ॐ ।
कर मध्य कमंडल , चक्र त्रिशूलधरता ।
जगकर्ता जग्भरता , जग संहार करता । ॐ ।
ब्रह्म विष्णो सदाशिव , जानत अभिवेका ।
प्रणयवाश र के मध्य , ये तीनो एका । ॐ ।
काशी में विश्वनाथ विराजे , नन्न्दो ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पाए ,शिवजी की महिमा अति भारी । ॐ ।
त्रिगुनानन स्वामी , की आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द, नर सुख सम्पति पावे । ॐ ।
ॐ जय शिव ॐ करा हो स्वामी हर शिव ॐ करा ।
ब्रम्हा विष्णो सदाशिव अर्धांगी धरा । ॐ ।

2 टिप्‍पणियां:

  1. कर्पुर गौरम करुणाअवतारं संसार सारं भुजगेन्द्र हारम् ।
    सदावसन्तम हृदया विंदे भवम भवानी सहितम नमामि । ।

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